साधू संत क्यों पहनते है गेरुए (भगवा ) रंग के कपड़े – जानिए इसका राज

हमारे धर्म में साधुओ को ईश्वर की प्राप्ति का माध्यम समझा जाता है | दिव्य और सिद्ध योगी साधू बड़े ज्ञानी और भला करने वाले होते है पर कुछ अज्ञानी लोगो ने साधुओ का चोला पहन कर उनकी महिमा को कलंकित कर दिया है | हमें जालसाज साधुओ से बचना चाहिए और अच्छे साधुओ की शरण लेनी चाहिए | आपने हिन्दू सनातन धर्म में साधू संतो को केसरिया , नारंगी या गेरुए रंग के कपड़े पहने हुए देखा होगा | क्या आपने कभी विचार किया है की आखिर इसी रंग के कपड़े क्यों पहनते है ये साधू |

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गेरुए (भगवा ) रंग का महत्व और फायदे
आपने सूर्योदय के समय सूर्य की किरणे देखी होगी जो नए दिन की शुरुआत में भगवा रंग बिखेरती है | गेरुआ यही दिखाने के लिए पहनते हैं कि आपके जीवन में एक नया सवेरा हो गया है। यह रंग दुसरो को यह भी बताता है यह सन्यासी है |
आज्ञा चक्र से सम्बन्ध है गेरूआ रंग का
हमारे शरीर में सात तरह के चक्र है जिसमे एक है आज्ञा चक्र | यह ज्ञान प्राप्ति का चक्र है जिसका भी रंग भगवा या गेरुआ है | यह रंग पहनने से वे आध्यात्मिक पथ के उच्चतम स्तर तक पहुँचने के लिए अग्रसर हो जाते है |

वातावरण के कुप्रभाव से करता है रक्षा :

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धार्मिक शास्त्रों के अनुसार सूर्य , चंद्रमा और अन्य उपरी वातावरण से हानिकारक किरणे हमारे ऊपर पड़ती है | ऐसा माना जाता है की इस भगवा रंग के कपड़े पहनने से यह दुष्प्रभाव शरीर पर कम पड़ता है | इसलिए हमारे ज्ञानी संतो और ऋषियों ने गेरुए रंग के वस्त्र पहनने के लिए चुने |

परिपक्वता का सूचक है यह रंग

यह रंग पकने का भी सूचक है। प्रकृति में कोई चीज पकती है, वह आमतौर पर नारंगी रंग की हो जाती है। यानी अगर कोई व्यक्ति परिपक्वता और समझदारी से ज्ञान के उच्चतम स्तर तक पहुंच जाता है तो उसका मतलब है कि उसका रंग नारंगी हो गया।

आचार विचार में आता है बदलाव

यह रंग साधू संतो के पहनावे का होने से इसे धारण करने वाला कोई पाप करने से पहले कई बार सोचता है | उसके आचार विचार बदल जाते है और उसे अपनी गरिमा में रहना होता है |

इस तरह आपने जाना की एक विशेष फायदे के लिए साधू संत यह गेरुए (भगवा ) रंग के कपड़े धारण करते है |

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